मैनेजर सन्देश

शिक्षा व् दीक्षा का सम्मिक्षण ही विद्या होती है। विद्या मनुष्य में जड़ता को समाप्त करती है वही वाणी में भी सत्य का संचार होता है, पाप से दूरी रखती है, दिशाओ में कीर्ति व्याप्त करती है, मान व् उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। विद्या के इसी उदेश्य को लेकर प्राइमरी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का प्रकाश पुंज फ़ैलाने के लिया सत् प्रयतनशील रहना ही वर्तमान की आवश्यकता है। ज्ञान मनुष्य जीवन का सार है इसलिए मनुष्य को इसे पाने का पुरषार्थ करना चाहिए।
अरविन्द कुमार
सचिव